कविता

वो हसीं थी सबके होठों की , पूरा घर उसके ईर्द – गिर्द घूमता रहता , सबकी प्यारी थी “कवि” !! उसके पायल की रूनझुन से पूरा घर गुलजार रहता । अपने छोटे-छोटे पावों से पूरी हवेली नाप जाती , सबको अपनी प्यारी – प्यारी बातों से खुश कर देती थी सबकी “कवि” ….यानी कविता । साहित्य से प्यार करने वाले परिवार ने बड़े ही प्यार से नाम रखा था , अपनी बिटिया रानी का । 

पर बड़े होते -होते उसे परिवार और समाज का खोखलापन दिखने लगा और वो किताबों के नज़दीक होती चली गयी । छुटपन में ही प्रेमचंद की सारी किताबें पढ़ ली थी उसने, सातवीं क्लास तक आते-आते शेक्सपीयर साहब से भी पाला पड़ गया । शायद इसलिए वो मानव संबंधो को बेहतर समझने लगी । अपने समझ के तराजू पर कभी डेसडिमोना- बियांका को तौलती कभी जालपा- जोह़राजान को ।

पर अब कवि अंतर्मुखी हो गई थी । ज्यादा दोस्त नहीं थे उसके । किताबों और रंग-बिरंगे स्केच पेन्स से यारी हो गयी थी अब । 

Advertisements

मेरी शायरी …

4. ठंढ़ बढ़ गयी है , सोचा ज़िस्म को पहरावों से ढ़क लेंगे ,

पर यहां तो रूह की तबीयत बिगड़ गयी …

मेरी शायरी… 

2. उन्हें देखा हमने जब उस रात , तो ये सोचने लगा की ये मेहंदी की परछाई है , या चेहरा शर्म से सुर्ख लाल हुआ जा रहा था ||

यूं ही…..

आज ऑफिस में कुछ काम बचा था, प्रिया भी अपने मायके गई है तो घर में कोई wait करने वाला भी नहीं था इसलिए मैं ऑफिस में अकेला बैठा अपने काम निपटाने लगा | बैठे -बैठे  mouse पर हाथ फेर रहा था तभी Facebook का notification  आया , तुमने भी श्वेता को उसकी शादी पर बधाई दी थी , जो की हम दोनों की दोस्त है ! अनायास ही तुम्हारे नाम पर click कर दिया मैने और फिर यादों के कई धागे खुलते चले गए ! और अपने cubicle में बैठा मैं आंसुओं के सैलाब में डूबता-उतराता रहा ! 

कवि ! तुम आज भी वैसी ही हो , बिलकुल नहीं बदली | वही सामाजिक सरोकार वाले posts , सबको अपने उसी चिर-परिचित अंदाज में कविता – रूपी बधाईयाँ , बिलकुल अपने नाम को साकार करते हुए | उस post को भी देखा जिसमे तुमने मेरी पहली job पर , मेरी सफलता पर मुझे बधाई दी थी , एक कविता के रूप में ही तुमने अपना दिल खोल के रख दिया था , हमारे सुखद भविष्य की कल्पना भी कर ली थी तुमने ! और मैं उस दिन से तुम्हें प्यार से ‘पगली’ बुलाने लगा | सच ! तुम कितनी devoted थी हमारे relationship में ! हम साथ थे , हम खुश थे , हमारे बीच प्यार भी था !  पर मेरी एक गलती ने सब बदल दिया , मैं शायद अंदाजा भी नहीं लगा सकता तुम्हें कितनी तकलीफ हुई होगी | 

प्रिया एक बहुत अच्छी पत्नी है , उसने मेरा जीवन संवार दिया | पर अब भी दिल के किसी कोने में तुम्हारा प्यार जिन्दा  है  पर उससे ज्यादा है guilt ! तुम शादी क्यूं नहीं कर रही ? तुम्हारे अकेलेपन से मुझे guilt  होता है कवि ! प्लीज कोई साथी ढूंढ लो !

(मेरी कहानी – ‘कविता’ का एक अंश )

नया घोंसला

हम दोनों घर के’फर्निचर सेटअप’ को ले के लड़ रहे थे….तभी अचानक चिड़ीयों की चहचहाहट से नींद खुल गई ! खिड़की से बाहर झांक के देखा तो गौरेये का जोड़ा आम के पेड़ पर नया घोंसला बना रहा था, और वो चहचहाहट नहीं लड़ाई थी शायद घर के ‘सेटअप’ को लेकर ! पर वो उनकी हक़ीकत हैं और मेरा सपना…:)

(मेरी कहानी – ‘कविता’ का एक अंश)